Surwala logo

Let's begin the Lyrical - Musical Journey with Surwala - submit your writings and drawings at [email protected] - 9 Lac+ hindi words added for searching hindi rhyming words


India की कविताएँ



देवभूमि by अमित मिश्रा

दिसंबर की सख्ती में टिमटिमाती पूरी और जवान दिल्ली
क्यों कभी याद दिलाती है मेरे दोस्त की नानी की जो बस लगती थी मेरी
जब उनको देखा सिर्फ उन्हें नहीं देख पाया
साथ दिखे उनके मस्तक के पीछे बर्फ से लदे पहाड़, जो थे उनसे भी प्राचीन
कच्चा आम खाया, चाय पी और निगल लिए ढेरों अपरिचित शब्द बड़ी विनम्रता से
फिर घूमने लगी सड़क नीचे की ओर, नसों से छीनने लगा खून, मेरा शहरी गाढ़ा काला खून
पहुंचा अपनी दीवारों में और एक दिन अचानक ऐसे ही सोच में डूब गया कि बस अभी नानी सो गई होगी क्या?
देवभूमि क्यों कहूं इसे यहाँ ऎसे कौन से देव है जो गंगा किनारे खरबूजे में नहीं बसते
यहाँ कौन से ऐसे काले पत्थर है जो समुंदर में डूब लिंगो से ज्यादा चिकने हैं
यहां कौन सा ऐसा मीठा पानी है जो ब्यास और झेलम में नहीं बहता
यहां तो बस है मेरे दोस्त की नानी जो बस लगती थी मेरी
यहां तो बस दूर से ढोल दमो और मुसलबाजा गुनगुनाता है कानों में
चुप पगडंडियों में चलो तो आधी याद कहानियां खुसपुसाती हैं
कभी दिन यहां काले और रात सफ़ेद होती हैं
तब पैर ठंडे और आत्मा और भी शीतल होती है
जब फूल खिलते हैं तो साथ में खिलती हैं लड़कियां
घास और फूस से लदी हुई दौड़ती हुई इन्हीं पहाड़ों पर
धूप इतनी सुस्त होती नहीं जितनी कर देते हैं चिलम के धुंए में यहां
रोटी इतनी जरूरी होती नहीं जितनी लगती है यहां
कोई चमकदार चांदी जैसा चेहरा किसी भारी पोशाक में लिपटा हुआ तन
मुझे नहीं याद जो मैंने देखा हो यहाँ
बस क्यों याद आती है मेरे दोस्त की नानी जो बस लगती थी मेरी
और याद आते हैं इस देवभूमि में न जाने कितने ही देवी देवता
जो इन सब में कहीं ना कहीं गश्त करते रहते हैं
इस पहाड़ से उस पहाड़ ठीक उसी रफ्तार से जिस रफ्तार से गश्त करती है जिंदगी यहां 

परिंदे by अमित मिश्रा

परिंदे उड़ गए सारे छत्ते हुए वीरान यूं ही
 आज कौन सा ऐसा काला साया दिखा इन्हें यूं ही
अरे इन से जाकर कहो कि आज तो सिर्फ एक ही लड़की गुम हुई है
 इस शहर से या बाजार से बस से या ऑटो से गांव से या शहर से, गिनती में पूरी पर सिर्फ एक
इतनी भी क्या बेरुखी है और है तो दिखलानी क्यों है और हमारा क्या हमने तो कुछ नहीं कहा किसी से
खुसपुसा लेते अपने घोंसलों में, पर उड़ गए, ये क्या?
यह तो सरासर अनकंस्टीट्यूशनल है
अब ग्लोबल वार्मिंग का क्या होगा? इकोसिस्टम का तो ख्याल रख लेते
पर परिंदे उड़ गए सारे छत्ते हुए वीरान यूँ ही एक के बाद एक
अरे इन से जाकर कहो भगौड़े पंछियों तुम्हें कहीं खुला आसमां नहीं मिलेगा
 हर आसमां में धुंआ है और फिर खलिश तो लड़की की शरीर की बनावट में ही है
आखिर लड़की की खाल ही असल लड़की है
फिर वुमन हेल्पलाइन है खाखी मिनटों में जाग जाती है
 ऍफ़ आई आर ईमेल कर दो, सब कुछ तो है
भाई साहब पगला गए हैं क्या? किससे बातें कर रहे हैं आप? कोई नहीं है यहां

बगावत by अमित मिश्रा

क्या है जो जमी हुई है मोटी खुरदुरी परत नदी के सबसे निचले हिस्से में, ये बगावत
अच्छा खासा चल रहा है दाना पानी क्यों कोई बिगाड़ रहा है सब
 ठंडी सी, अनजानी, सुलग रही, ये बगावत
शहद जैसी मिठास जो कल तक लग रही थी संजीवनी
 निगलि न जाए अब विष जैसी, ये बगावत
साथ रहने की आदत पर खा रहे थे कसमें
आज निकल पड़े झंडा लेकर जिंदगी तलाशने सब फूकेंगी, ये बगावत
सभ्य थे कल तक आंखें मूंदे कबूतर डैने फड़फड़ा रहे
लड़ा रहे सर पिंजरों से, लहू लहू, आगाज सूरज का, ये बगावत
कभी गेरुआ कभी लाल, कभी हरा सफेद
 बिलों में घुसे हुए चमकाते लोहा, ये बगावत
खोखले वादों की नई दुनिया में रखते पुराने थके ओझल कदम बिलबिलाते हुए, ये बगावत
मौत का डर अब और भी हो रहा है भीना
बरदाश्त और कितना बर्दाश्त कितनी झूठी, कितनी दोगली, ये बगावत

चितइ को धन्यवाद् by अमित मिश्रा

चितई गोलू से कोई खाली हाथ नहीं लौटता
पहली ही भेंट में मैंने भी अपनी अर्जी थमाने की सोची
आँखों के आगे झिलमिला उठी थी जिंदगी
 बस आज तो बोल ही देना था
लिस्ट लंबी थी समय कम था
तो सोचा पहले दो-चार सबसे जरूरी पहलुओं का जिक्र कर दूं
 हमेशा की तरह मेरी प्लैनिंग अचूक
मुझसे पहले और भी कई मिल गए थे चितई से लाखों इन हजारों सालों में
तभी, पहली नजर पड़ी एक छोटी और स्पष्ट चिट्ठी पर
 वह एक मां की थी जिसने अपनी अपाहिज संतान की अर्जी डाली थी
दूसरी चिट्ठी में था एक कभी न खत्म होने वाला इंतजार कोई खो गया था उनका
तीसरी में बेबसी, चौथी में टूटा हुआ दिल, पांचवी में अकेलापन और छटी में बर्बादी
फिर कई आई अर्जियां, प्रार्थनाएं, पढ़ ली सारी
जब किसी ने धक्का लगाया पीछे से तो सामने थे चितइ
और तब याद आयी मेरी सबसे गैर मामूली कोशिश
मेरी एक भूली बिसरी खुशी
मेरी अड़ियल जिद्दी सांसे
धन्यवाद चितई गोलू आज बस इतना ही


Contact Us © Copyright 2022-2023